क़त्ल कर के खंजर दिखा के वो बोले ..
मोहब्बत तो थी मगर ,
हमने भी निकाले दिल के अरमान हौले हौले ....
Collection of my few writing attempts, I use to write here what I feel around me.
Friday, January 21, 2011
Thursday, January 13, 2011
उम्म्म्म
तेरे घर में बस तू ही तू है ,
बता की मै आऊं कैसे
झांक के देखा दिल में तेरे
जगह कम है समाऊँ कैसे
तू जो देखता उधर है
पीठ पीछे तुझे बहलाऊँ कैसे
रूठ के तू दूर छूट गया है
करके जतन तुझे मनाऊँ कैसे
बता की मै आऊं कैसे
झांक के देखा दिल में तेरे
जगह कम है समाऊँ कैसे
तू जो देखता उधर है
पीठ पीछे तुझे बहलाऊँ कैसे
रूठ के तू दूर छूट गया है
करके जतन तुझे मनाऊँ कैसे
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वादा है की
सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों उलझने हों या अफ़साने हों खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...
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