नज़रअंदाज़ हैं करीब के ठिकाने
चाह मे बस दूर बसे आफताब हैं
कीमत नही उनकी जो सच हो गये
बेशक़ीमती हैं वो जो ख्वाब हैं
Collection of my few writing attempts, I use to write here what I feel around me.
सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों उलझने हों या अफ़साने हों खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...