नापो हर रास्ते आँखों से मगर
हर सड़क पे फिसल जाने का नही
चले जाओ ख्वाबों को तलाशते हुए कही भी
पर हर ख्वाब पे मचल जाने का नही
सुन लो हर शिकवे को तवज्जो दो हर ज़ुबान को
पर हर झूठ पे बहल जाने का नही
बदल डालो हर ख्वाब को हक़ीकत मे मगर
मगर नयी हक़ीक़त मे इंसान बदल जाने का नही
रोशन करो राहें आहिस्ता आहिस्ता मगर
इस जल्दबाज़ी मे जल जाने का नही
जाने से पहले मिलने को एक बार तो ताकीद करना
एक मौका दे देना मनाने को
बिन बताए चुपके से निकल जाने का नही
शराफ़त से बन के रहो बर्फ शराब मे
अकेले अकेले पिघल जाने का नही