Wednesday, February 19, 2020

Inspired by बुलाती है मगर जाने का नइ

नापो हर रास्ते आँखों से मगर 
हर सड़क पे फिसल जाने का नही
चले जाओ ख्वाबों को तलाशते हुए कही भी 
पर हर ख्वाब पे मचल जाने का नही 
सुन लो हर शिकवे को तवज्जो दो हर ज़ुबान को 
पर हर झूठ पे बहल जाने का नही  
बदल डालो हर ख्वाब को हक़ीकत मे मगर 
मगर नयी हक़ीक़त मे इंसान बदल जाने का नही 
रोशन करो राहें आहिस्ता आहिस्ता मगर 
इस जल्दबाज़ी मे जल जाने का नही 
जाने से पहले मिलने को एक बार तो ताकीद करना 
एक मौका दे देना मनाने को 
बिन बताए चुपके से निकल जाने का नही 
शराफ़त से बन  के रहो बर्फ शराब मे 

अकेले अकेले पिघल जाने का नही 

ज़रूरत

इश्क़ करता हूँ मै तुमसे
जो ये  बता सके उस कलाम की ज़रूरत है
पुरुष हूँ मै  पर  उन  इरादों का नही
जो ये बता सके उस नाम की ज़रूरत है
गुज़ार लूँ ज़िंदगी जितना वक़्त
दे जो इतना इफ़रात वक़्त बस उस काम की ज़रूरत है
और जो खाली बैठूं
तो सिर्फ़ तुम्हे सोच पाऊँ इतने आराम की ज़रूरत है
अकेला ना बैठूं कभी
सिर्फ़ तुम्हारे साथ गुज़रें इतनी शाम की ज़रूरत है
रहूं गुमनाम ता उम्र मै
जो जुड़े तो बस तुमसे जुड़ जाए उस नाम की ज़रूरत है 

वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...