Thursday, May 16, 2019

मेरे बारे मे

पूछता रहता हूँ लोगो से  क्या कभी पूछा था उसने मेरे बारे मे
वो बोले की बता दिया की वो पूछ रहा था तेरे बारे मे

आता जाता तकता रहता हूँ पुरानी मज़ारों को
की शायद उसने कुछ  कहा हो किसी से  मेरे  लिए इशारे मे


Friday, May 10, 2019

Sabak

मुतासीर  नही होता आजकल
उम्मीदें भी कम कर रहा हूँ
इस सबक ने हराया नही है मुझे
बस रुक के थोड़ा दम भर रहा हूँ 

Wo Badal Ka Tukda

महक से अपनी आज वो आवाज़ दे गया है बरसते बरसते
आकर ठहर जाने का अंदाज़ दे गया है वो बरसते बरसते


छेड़ कर छोड़ देना या छोड़ कर छेड़ देना तरीका था उसका
अधूरी रहे उस कहानी को आगाज़ दे गया है बरसते बरसते

मक़बूल थी अदायें और शौक उस सितम-गर के
ख्वाबों को पर-ए- परवाज़ दे गया है वो बरसते बरसते

जरी के काम सा बुन  गया ताना बाना रूह पे
पूछता रहे सवाल वो समाज़ दे गया है बरसते बरसते

वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...