Wednesday, January 6, 2010

दिल की शिकायत

गौर किया तो लगा दिल की शिकायत सही है
आज कल कलम की हम पे इनायत नहीं है
हुए दूर कागज़ और स्याही से अब हम
कहते हैं लोग बदल मेरी इबादत गयी है

जो थी कल तक कैफियत और जो दस्तूर था
जो जारी कल तक बदस्तूर था
शायद अब वो नियत बदल गयी है
वो था दिन दूसरा जिसकी शाम ढल गयी है

बेमौसम बारिश की किसे प्यास है
पर कुछ बूंदों की तो हमें तलाश है
फिर अब पुरानी स्याही से लिखनी इबारत नयी है
मान लेते हैं वो आरजू जो अपने दिल ने कही है

कॉपीराइट रमन शुक्ला :)

Friday, January 1, 2010

Resolution of new year 2010 नव वर्ष के क्रन्तिकारी परिवर्तन

Nothing can be better to start writing all this here now , as its only 2:30 past to New year 2010 just started.
वैसे तो हम सभी अपने अपने मन में कुछ न कुछ सोच के रखते हैं की नए साल में ये करेंगे वो करेंगे और कुछ न हुआ तो सब कुछ करेंगे !!!! :प फिर मैंने सोचा की मन में सोच के रखने से क्या फायदा बेहतर है की मै इन कर्नातिकारी परिवर्तनों को यंहा सार्वजनिक रूप से लिख दूं जिससे की इस वर्षोपरांत मेरे अलावा बाकि भी ये सुनिश्चित कर सके की वास्तव में मैंने उन लक्ष्यों को हासिल किया या नहीं !!

१) सर्वप्रथम मै इस वर्ष के बाद अब और कुंवारा नहीं रहना चाहता तो not priority but I will try to search a fellow companion for my journey of life.

२) पिछले कुछ वर्षों से मै हर वर्ष लेह जाने का कार्यक्रम बनता हूँ पर किसी न किसी वजह से जा नहीं पाया हूँ परन्तु इस ग्रीष्मावकाश में मै निश्चित ही लेह जाऊंगा

३) इस साल मै २ कार खरीदना चाहता हूँ एक अपने पिता जी के लिए और एक अपने लिए

४) I am still short to complete my both novels which I have started last year so I am more than willing to get both these novel published by any chance

५) last but not the least I want to scale up my company to 50 employees and almost 2 million USD revenue

Lets see how much of these I am able to achieve.. wish me luck and encourage me time to time so that I can achieve all these this year.

वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...