जब से वो है आई इसकी जिंदगी में
कामचोर की गाली ये मैनेजर से खाने लगा है
जाता है जल्दी ऑफिस देर से घर आने लगा है
बाइक की पिछली सीट नही कभी खली
पेट्रोल ये पानी की तरह बहाने लगा है
वीकएंड पे इसे घर चाहिए खाली
क्यूंकि उनको घर ये लाने लगा है
घर और दोस्तों को लगाता नही फ़ोन फ़िर भी
मोबाइल बिल ४ डिजिट में आने लगा है
बियर मुर्गा छोड़ के आजकल
ये गोल गप्पे और सेव पूरी खाने लगा है
सचिन की सेंचुरी मिस होने का गम नही
कहानी घर घर की आजकल बताने लगा है
हफ्ते में एक दिन पानी देखने वाला
आजकल सुबह शाम नहाने लगा है
इमोसनली बैलेंस है लाइफ इसकी
बस बैंक बैलेंस गडबडाने लगा है
जब से वो है आई इसकी जिंदगी में
हमें भी किसी पे तरस आने लगा है
कॉपीराइट रमन शुक्ला :)
Collection of my few writing attempts, I use to write here what I feel around me.
Tuesday, November 10, 2009
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वादा है की
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