बायें ज़ेब मे उनके मरहम था
पर वो आग लगा के चल दिए
सफाई देके करना था रफ़ा दफ़ा
और वो दाग लगा के चल दिए
पर वो आग लगा के चल दिए
सफाई देके करना था रफ़ा दफ़ा
और वो दाग लगा के चल दिए
Collection of my few writing attempts, I use to write here what I feel around me.
Bas ek farak hai chand aur tumme Ki qo roz badalta hai Bas ek farak hai chand aur tumme Ki wo roz dhalta hai
एक याद थी अधूरी सी एक छोटी सी रात की उसमे आवाज़ें गूँजती थी एक अनकही सी बात की रास्तों के शोर मे शहर की भोर मे वो याद ढलती गयी समस्यायों के निदान मे भविष्य के संज्ञान मे सबके पीछे वो चलती गयी सही के उल्लास मे ग़लत के शोक मे तिल तिल करके वो जलती गयी थी गल्ति या नही सोच के वो ग़लती गयी अदखिले से फूल देख के गुनगुनी धूप सेंक के मगर लौट वो आती थी चेहरे पे देख लट लटकती जब पन्नों पे ये उंगलियाँ भटकती हर मर्तबा वो लौट आती थी बन के भीगी सी आँख सी बन के भारी सी साँस सी वो जो एक याद थी अधूरी सी एक छोटी सी रात की उसमे आवाज़ें गूँजती थी एक अनकही सी बात की
सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों उलझने हों या अफ़साने हों खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...