Sunday, March 25, 2018

Apne paraaye

इन ज़मीन के टुकड़ों मे अपनों के कुछ घर थे जो दूसरों के मकानों मे तब्दील हो गये ..

   समझाने को मुझे  इस बदलाव की खूबसूरती मेरे अपने भी कुछ वक़ील हो गये 
- Raman Shukla

Sunday, March 18, 2018

Ran ki tayiyaari

सन्त्रप्त इस विपत्ति काल मे निंद्रा कोसों दूर हो
 भौंहे चढ़ि तन ताना जैसे खड़ा कोई वीर शूर हो
तैयार रण को हो तेरे हाथों मे शश्त्र शत्रु के काल हो
समय आक्रमण का है ना किंचित मन मे भी कोई ढाल हो

Thursday, March 15, 2018

मुख्तसर अपनी मुलाकात होती है

सोचता रहता हूँ लंबी होगी बातों की फेहरिस्त
पर मुख्तसर अपनी मुलाकात होतीं हैं
यादों के साए मे बीत जाते हैं दिन
मुश्किल  बिताना वो छोटी सी रात होती है
गैर मौजूदगी मे तेरे मौसम तो सारे बीत जाते हैं
 बस मुश्किल बिताना वो बरसात होती है
इतना भी वक़्त नही मयस्सर की खो जाऊं  तुझमे
की बस मुख्तसर अपनी मुलाकात होती है

Friday, March 9, 2018

जब वो नाराज़ होते हैं !!

तकब्बुर लगेगा लोगो को तेरा ये लहज़ा
हमे तो ये अंदाज़ - ए- रग़बत  लगता है
एक मुअम्मा होगा दूसरों की समझ ले लिए
हमे ये ज़रिया - ए-  कुरबत लगता है 

वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...