चला हूँ जिस पथ पे अब तो
पाउँगा मंजिल इसी रास्ते से
भले ही कुछ देर हो जाये
कर्त्तव्य मेरा सिपाही सा
बेहतर है पीछे लौटने से
रण में ही ढेर हो जाये
शाम हो गयी तो क्या
उजालों की तलाश अब
और एक बेर हो जाये
धुंधली दिख रही है तस्वीरें
फिर भी देखूंगा सूरज
ठहरो जरा सबेर हो जाये
** बेर = उत्तर प्रदेश की कड़ी बोली में बेर का तात्पर्य होता है एक बार i.e. once
कॉपीराइट रमन शुक्ला :)
Collection of my few writing attempts, I use to write here what I feel around me.
Tuesday, April 20, 2010
Monday, April 19, 2010
हुआ है ये क्या असर
ए हसीं तुझे देख कर
हुआ है ये क्या असर
की जग पड़ी ..दबी हसरतें
चल पड़ा थमा सफ़र
मुस्कुराने लगी
वो खोयी हुई हँसी
गुनगुनाने लगी
जो थी धुन दिल में बसी
लम्हों में जीने लगा
बस तेरा ख्याल कर
ए हसीं तुझे देख कर
हुआ है ये क्या असर
तारीख थम सी गयी
जब से वो गुजरा है पल
आँख नम हो गयी
दिखा न जो फिर तू कल
लफ्ज़ खामोश हैं
बोलने को बेक़रार हैं नज़र
ए हसीं तुझे देख कर
हुआ है ये क्या असर
तलाशते हैं तुझे
आते जाते हुए
लौट आये हैं आज
फिर गुनगुनाते हुए
जँहा ये रोशन हैं
बस ये दिल हैं सिफ़र
ए हसीं तुझे देख कर
हुआ है ये क्या असर
कॉपीराइट रमन शुक्ला :)
हुआ है ये क्या असर
की जग पड़ी ..दबी हसरतें
चल पड़ा थमा सफ़र
मुस्कुराने लगी
वो खोयी हुई हँसी
गुनगुनाने लगी
जो थी धुन दिल में बसी
लम्हों में जीने लगा
बस तेरा ख्याल कर
ए हसीं तुझे देख कर
हुआ है ये क्या असर
तारीख थम सी गयी
जब से वो गुजरा है पल
आँख नम हो गयी
दिखा न जो फिर तू कल
लफ्ज़ खामोश हैं
बोलने को बेक़रार हैं नज़र
ए हसीं तुझे देख कर
हुआ है ये क्या असर
तलाशते हैं तुझे
आते जाते हुए
लौट आये हैं आज
फिर गुनगुनाते हुए
जँहा ये रोशन हैं
बस ये दिल हैं सिफ़र
ए हसीं तुझे देख कर
हुआ है ये क्या असर
कॉपीराइट रमन शुक्ला :)
Tuesday, April 13, 2010
जाओ मै कुछ भी लिखूंगा !!
खाने से संतृप्त पेट
और ऊपर से सिगरेट
दोस्त की शादी में तमाशा
और व्यापर में मुनाफा
....... अच्छा लगता है !!
जन्मदिन पे दोस्तों की लात
तोहफों की बरसात
सुबह आलू का पराठा
और रात में सन्नाटा
......अच्छा लगता है !!
और ऊपर से सिगरेट
दोस्त की शादी में तमाशा
और व्यापर में मुनाफा
....... अच्छा लगता है !!
जन्मदिन पे दोस्तों की लात
तोहफों की बरसात
सुबह आलू का पराठा
और रात में सन्नाटा
......अच्छा लगता है !!
Friday, April 2, 2010
Me!!
I always wanted to be I
and she wanted us to be We
she wanted us so together
and i wanted to fly free
so buddies share some moments
enjoy chattering of birds
& covering of tree
else u will be alone out there like me!!
and she wanted us to be We
she wanted us so together
and i wanted to fly free
so buddies share some moments
enjoy chattering of birds
& covering of tree
else u will be alone out there like me!!
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वादा है की
सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों उलझने हों या अफ़साने हों खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...
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मेरे दिल में बसा कोई ख्वाब हँसा तो लगा की ये दिन ख़ास है मुस्कुरा के सुबह जो यूँ धरती पे आई जैसे सुहानी सी सौगात है जब जमीं पे पड़ी वो पानी ...
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सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों उलझने हों या अफ़साने हों खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...
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गुजर जाओ यहा से तो कभी लौट के भी आना है तुम्हारे पीछे चला आ रहा हूँ यह बताने के लिए और तुम हो की डर से सिमाटते जा रहे हो खुद को मुझ...