सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों
नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों
उलझने हों या अफ़साने हों
खफा हों तुमसे या तुम्हारे दीवाने हों
ज़िंदगी चाहे जो कहानी कहेगी
वादा है की ये मोहब्बत ऐसे ही रहेगी
बिताने को लम्हा मिले या उम्र मिले
सुकून रहे या शिकवे गिले
बुलंद बनूँ या भीड़ मे खो जाऊं
जागूं देर तक या अभी सो जाऊं
लेकिन मेरी कविता कहानी तेरी कहेगी
वादा है की मोहब्बत ये ऐसी ही रहेगी
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