जिरह करते करते दूसरों से तुम्हारे बारे मे
ना जाने कितनी महफ़िलों मे ज़लील हो गये
पैरवी करते करते अपने मामले की तुमसे
पता ही नही कब हम हारे हुए वकील हो गये
ना जाने कितनी महफ़िलों मे ज़लील हो गये
पैरवी करते करते अपने मामले की तुमसे
पता ही नही कब हम हारे हुए वकील हो गये