Wednesday, July 26, 2017

Bola to tha

कोशिश कब से की
        पर कामयाब नही
आँखो से बोलता रहा
   मुह से निकली आवाज़ नही
अरसा हो गया पिछली बार मिले
  कहा उसे आख़िरी मुलाकात नही
की होती ज़रा हक़ से कोशिश
 तो होता आज फासला इतना परवाज़ नही
कोशिश तब जो की वो कामयाब नही

Tuesday, July 18, 2017

हर बात अधूरी रह गयी

कुछ रात पूरी बह गयी
हर बात अधूरी रह गयी
तुझे तकने मे ही बीत गया लम्हा
तुझे आँखो से ढकने मे ही बीत गया लम्हा
दिन भर का इंतेज़ार था
बस तू दो पल मे कहानी कह गयी
यूँ वो रात पूरी बह गयी
बस तेरी महक कस्तूरी रह गयी

Friday, July 14, 2017

Raaste

गुजर जाओ यहा से तो कभी लौट के भी आना है
   तुम्हारे पीछे चला आ रहा हूँ यह बताने के लिए
और तुम हो की डर से सिमाटते जा रहे हो
  खुद को मुझसे बचाने के लिए
फैली हुई है जो यहा की आबो हवा
उसी का दोष है तुम्हारा ऐसा समझना
तुम बस एक और को ना खो दो  
तुम्हारे पीछे चला आ रहा हूँ यह समझाने के लिए 

Wednesday, July 12, 2017

हम खो क्यूँ जाते हैं जब तुम मिल जाते हो

हम खो क्यूँ जाते हैं जब तुम मिल जाते हो
  रास्ते मे सुबहा दोपहर रात मे
मदहोश क्यूँ हो जाते हैं जब तुम घुल जाते हो
 होने वाली मेरी हर बात मे
रुक जाते हैं आँखे , अटक जाती हैं साँसे जब तुम ढल जाते हो
निकलने वाले मेरे हर जज़्बात मे
सलवटें पड़जाती हैं मेरे बाकी रिश्तों मे जब तुम चले आते हो
 बिन बताए मेरे हर ख़यालात मे
हम खो क्यूँ जाते हैं जब तुम मिल जाते हो
  रास्ते मे सुबहा दोपहर रात मे

वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...