सुर्ख अहसास हैं कही साझा ज़ज्बात है कहीं
झूले से पास आते और कभी दूर जाते हालात हैं कहीं
छुपाने को सभी से कभी रात की वीरानीयाँ हैं
मत पूछ की क्या मेरे तेरे दरमियाँ है
सवालों की फेह्रिश्त है उम्मीदों की उलझने है
कहीं बिखरते और कही बनते सभी के सपने हैं
बात से बेहतर एक टक एक दूजे को देखती खामोशियाँ है
अब मत पूछ की क्या मेरे तेरे दरमियाँ है
अलग शहरों के मिज़ाज है पर संग संजोते ख्वाब है
साथ बिताए हुए लम्हों की खुशी बेहिसाब है
अब शाम ढलने को एक साथ लंबी होती परछाईयाँ है
अब मत पूछ की क्या मेरे तेरे दरमियाँ है
झूले से पास आते और कभी दूर जाते हालात हैं कहीं
छुपाने को सभी से कभी रात की वीरानीयाँ हैं
मत पूछ की क्या मेरे तेरे दरमियाँ है
सवालों की फेह्रिश्त है उम्मीदों की उलझने है
कहीं बिखरते और कही बनते सभी के सपने हैं
बात से बेहतर एक टक एक दूजे को देखती खामोशियाँ है
अब मत पूछ की क्या मेरे तेरे दरमियाँ है
अलग शहरों के मिज़ाज है पर संग संजोते ख्वाब है
साथ बिताए हुए लम्हों की खुशी बेहिसाब है
अब शाम ढलने को एक साथ लंबी होती परछाईयाँ है
अब मत पूछ की क्या मेरे तेरे दरमियाँ है
झूले से पास आते और कभी दूर जाते हालात हैं कहीं
छुपाने को सभी से कभी रात की वीरानीयाँ हैं
मत पूछ की क्या मेरे तेरे दरमियाँ है
सवालों की फेह्रिश्त है उम्मीदों की उलझने है
कहीं बिखरते और कही बनते सभी के सपने हैं
बात से बेहतर एक टक एक दूजे को देखती खामोशियाँ है
अब मत पूछ की क्या मेरे तेरे दरमियाँ है
अलग शहरों के मिज़ाज है पर संग संजोते ख्वाब है
साथ बिताए हुए लम्हों की खुशी बेहिसाब है
अब शाम ढलने को एक साथ लंबी होती परछाईयाँ है
अब मत पूछ की क्या मेरे तेरे दरमियाँ है