Friday, March 12, 2010

यूँ ही अईसे ही

मेरे दिल में बसा
कोई ख्वाब हँसा
तो लगा की ये दिन ख़ास है
मुस्कुरा के सुबह
जो यूँ धरती पे आई
जैसे सुहानी सी सौगात है
जब जमीं पे पड़ी
वो पानी की बूँदें
क्या खुशनुमा सा ये एहसास है
गीली रेत पे छोटे
क़दमों के निशान
एक लम्बे सफ़र की शुरुआत है
छोटे छोटे मोती हैं
ये आपस में गूंथे हुए
सोचो तो कितनी ही खूबसूरत ये कायनात है

वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...