Sunday, September 12, 2010

दो लाइने

तनहा ठहरा हूँ सहरा में वरना अभी डूब जाने को गम बहुत हैं
मिला था जो दिल वो तोड़ आया हूँ , वरना दिल चुराने को सनम बहुत हैं

वैसे तो लरजते लफ़्ज़ों से शायरी कर रहा होता अभी तो बताने को गम बहुत हैं
मुफलिसी में उनको याद करता हूँ वरना करने को इस दुनिया में करम बहुत हैं

कॉपीराइट रमन शुक्ला :)

What I Love

What I love is
not profession but my obsession
might not bitches but the beaches
perhaps not possession but the passion
and I love is that
old wealthy tradition
I love to show
a grin to enemies and hugs to friends
applauds to smart ass and
middle finger to sloppy brains,
I love to read
I love to drive
in a war field I love to survive,
conquer the quest,
Defeating the best
is exactly what I love
is to finish the job before I could rest.

कॉपीराइट रमन शुक्ला :)

Sunday, September 5, 2010

रुसवा

बहुत कुछ तुम समझते हो
या समझते कुछ नहीं तुम हो
यहाँ पर अश्क बहते है
अगर कही तुम जो गुमसुम हो
अगर तुम्हारा दिल शीशे सा है बिखरा
तो हमरा भी रेत का महल टूटा है
फेर कर मुह कभी भी तुम चले जाओ
पर मत बोलो की वो सनम था जो झूठा है

की शायद आज इन बातों पे यकीं तुमको न हो
पर कभी तो सच खुल कर आएगा
दोनों ही शायद तब अफ़सोस से रोयेंगे
पर सच किसी से कहा न जायेगा .......

कॉपीराइट रमन शुक्ला :)

वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...