सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल मे है
कहने वाला हर कोई
बाज़ारो घरों और दफ़्तरों के बिल मे है
परेशानी सड़कों पे क़ाबिज़
ख़ौफ़ अब हर तिल तिल मे है
तड़पति इंसानियत ढूँढती मसीहा
झाड़ू कमल और हाथ मे
उसे क्या मालूम की चल रहे है
साँप आस्तीन के साथ मे
मुल्क और अदालत मे पेश मसौदा
अच्छाइयों के कत्ल का
पाएँगे इंसाफ़ पाक साफ सा
ये अरमान हर नज़र के दिल मे है
मासूमों को क्या मालूम की शामिल
कातिल जिरह करने वालों की महफ़िल मे है
कॉपीराइट - रमन शुक्ला ©