Wednesday, April 27, 2011

तुम

तुम रह जाते तो सुकून रह जाता
थाम के हाथ तुम्हारा हर गम सह जाता ..
दरिया या समंदर कही भी कश्ती चला देता ..
मरू बंजर में भी फूल खिला देता ..
कुछ और देर रहते तो कुछ कह सुन पाता ..
... कुछ और दिन जीने का जूनून रह जाता ...
तुम रह जाते तो सुकून रह जाता...
कॉपीराइट रमन शुक्ला :)


वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...