Wednesday, September 11, 2019

बेशक़ीमती


नज़रअंदाज़ हैं करीब  के ठिकाने
चाह मे बस दूर बसे आफताब हैं
कीमत नही  उनकी जो सच हो गये
बेशक़ीमती हैं वो जो ख्वाब हैं

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वादा है की

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