Tuesday, January 7, 2020

वक़्त गुजर दिया

उम्रदराज़ हो गये बस
टूटे ख्वाबों को जोड़ते हुए
काफ़ी वक़्त गुजर दिया
बिना लिखे खातों को मोडते  हुए
खुशी तुम्हारी और हम आंशू बहा दिए
दर्द खुद का निचोड़ते हुए
रूह फैल रही थी अब जब
तब रात बिता दिए जिस्म सिकोडते हुए
बहुत कुछ छू गये थे तुम
बस उनसे ही घर सज़ा दिया तुम्हे छोड़ते हुए
उम्रदराज़ हो गये बस
टूटे ख्वाबों को जोड़ते हुए

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