समेट के रखता हूँ खुद को तुमसे मिलने के इंतेज़ार मे
और मुलाक़ात के बाद हर बार बिखरता रहा हूँ मै
सयानों ने कहा की मुलाक़ात मे पर्देदारि रखना
इसीलिए रूबंद उठाने से झिझकता रहा हूँ मै
आज़ाब कभी तुम्हारे कभी कभी मिलने का नही रहा
क्यूँ बीत जाता है इसलिए बस वक़्त से लड़ता रहा हूँ मै
बा सॅमयीन तब्दीली बहुत है मेरे मिज़ाज़ मे
कैसे बताऊं की तेरे ज़ायकों के हिसाब से बदलता रहा हूँ मै
ता उम्र का साथ ना मुयस्सीर का ख़याल बिखरने को काफ़ी था
बस कुछ चाँद रातें मिलोगे ये सोच के ही संभलता रहा हूँ मै
समेट के रखता हूँ खुद को तुमसे मिलने के इंतेज़ार मे
और मुलाक़ात के बाद हर बार बिखरता रहा हूँ मै
और मुलाक़ात के बाद हर बार बिखरता रहा हूँ मै
सयानों ने कहा की मुलाक़ात मे पर्देदारि रखना
इसीलिए रूबंद उठाने से झिझकता रहा हूँ मै
आज़ाब कभी तुम्हारे कभी कभी मिलने का नही रहा
क्यूँ बीत जाता है इसलिए बस वक़्त से लड़ता रहा हूँ मै
बा सॅमयीन तब्दीली बहुत है मेरे मिज़ाज़ मे
कैसे बताऊं की तेरे ज़ायकों के हिसाब से बदलता रहा हूँ मै
ता उम्र का साथ ना मुयस्सीर का ख़याल बिखरने को काफ़ी था
बस कुछ चाँद रातें मिलोगे ये सोच के ही संभलता रहा हूँ मै
समेट के रखता हूँ खुद को तुमसे मिलने के इंतेज़ार मे
और मुलाक़ात के बाद हर बार बिखरता रहा हूँ मै
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