Wednesday, January 29, 2020

संभलता बिखरता रहा हूँ मै

समेट के रखता हूँ खुद को तुमसे मिलने के इंतेज़ार मे
और मुलाक़ात के बाद हर बार बिखरता रहा हूँ मै

सयानों  ने कहा की मुलाक़ात  मे पर्देदारि रखना
इसीलिए रूबंद उठाने से झिझकता रहा हूँ मै

आज़ाब कभी  तुम्हारे कभी कभी मिलने का नही रहा
क्यूँ बीत जाता है इसलिए बस वक़्त से लड़ता रहा हूँ मै

बा सॅमयीन तब्दीली बहुत है मेरे मिज़ाज़ मे
कैसे बताऊं की तेरे ज़ायकों के हिसाब से बदलता रहा हूँ मै

ता उम्र का साथ ना मुयस्सीर का ख़याल बिखरने को काफ़ी था
बस कुछ चाँद रातें मिलोगे ये सोच के ही संभलता रहा हूँ मै

समेट के रखता हूँ खुद को तुमसे मिलने के इंतेज़ार मे
और मुलाक़ात के बाद हर बार बिखरता रहा हूँ मै

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वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...