Monday, December 28, 2009

जिंदगी

एक अजनबी अहसास है
दूर है तू तो बढती प्यास है
हो नजदीक तो कुछ ख़ास है
गैरों की भीड़ में किसी अपने की तलाश है जिंदगी ...

जवाब तू जिस सवाल का है
होश तू जिस ख्याल का है
जिस शाम का तू जाम है
इन सभी का नाम है जिंदगी ....

वो हकीकत जिससे दिल रूबरू है
हर लम्हा जिससे शुरू है
ख्वाब जिसके नींद में बेनकाब है
इन सभी फलसफों का जवाब है जिंदगी ...

जो इस हँसी का गुरूर है
जो दिल का मेरे नूर है
जिससे दिन मेरा मसरूफ और
रात को आराम है
हर शायर का वो कलाम है जिंदगी ...

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वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...