एक अजनबी अहसास है
दूर है तू तो बढती प्यास है
हो नजदीक तो कुछ ख़ास है
गैरों की भीड़ में किसी अपने की तलाश है जिंदगी ...
जवाब तू जिस सवाल का है
होश तू जिस ख्याल का है
जिस शाम का तू जाम है
इन सभी का नाम है जिंदगी ....
वो हकीकत जिससे दिल रूबरू है
हर लम्हा जिससे शुरू है
ख्वाब जिसके नींद में बेनकाब है
इन सभी फलसफों का जवाब है जिंदगी ...
जो इस हँसी का गुरूर है
जो दिल का मेरे नूर है
जिससे दिन मेरा मसरूफ और
रात को आराम है
हर शायर का वो कलाम है जिंदगी ...
Collection of my few writing attempts, I use to write here what I feel around me.
Monday, December 28, 2009
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वादा है की
सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों उलझने हों या अफ़साने हों खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...
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मेरे दिल में बसा कोई ख्वाब हँसा तो लगा की ये दिन ख़ास है मुस्कुरा के सुबह जो यूँ धरती पे आई जैसे सुहानी सी सौगात है जब जमीं पे पड़ी वो पानी ...
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सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों उलझने हों या अफ़साने हों खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...
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गुजर जाओ यहा से तो कभी लौट के भी आना है तुम्हारे पीछे चला आ रहा हूँ यह बताने के लिए और तुम हो की डर से सिमाटते जा रहे हो खुद को मुझ...
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