Saturday, February 20, 2010

धत पागल हो गए हो क्या !!

याद करो कोचिंग या क्लास में बैठे हुए बगल वाले लड़के का कहना की देख बे वो तुम्हे ही देख रही है , फिर खुद ही बाकि क्लास में खबर फैला देना की वो हमें ही देख रही थी तब सबसे अछे दोस्त का पास आके पूछना "क्यूँ बे सीरियस हो क्या बे " तो जवाब में मुह से बस यही निकलता था "धत पागल हो गए हो क्या " !! कितना पुराना पर प्रासंगिक वाक्य है ये । शायद ही कोई ऐसा हो जिसने ये वाक्य न प्रयोग किया हो , शायद यही वो वाक्य था जिसके प्रयोग करते ही समझ में आ गया था की "मन मन भावें मूड हिलावें " का प्रायोगिक अर्थ क्या है । आश्चर्य तो तब हुआ जब हमने साल दर साल इस वाक्य की पुनरावृत्ति अनगिनत (अतिश्योक्ति अलंकार है कम से कम ५-६ बार तो गिन ही लो ) बार की ।
खैर क्या किया जा सकता था हम उस देश का हिस्सा है जो पिछले ६० सालों से पडोसी देश पाकिस्तान से प्यार मांग रहा है , पर इस देश के किसी नागरिक को अपने ही पडोश में रहने वाली कन्या के साथ प्यार का लेनदेन करते हुए पकडे पाए जाने लड़के को आवारा और लड़की को पता नहीं किन किन विशेषणों से प्रसिद्ध कर दिया जाता है, बस उन्ही अवांछनीय शब्दों और उन हिकारत भरी निगाहों से बचने के लिए हम आज भी कहने से चुकते नहीं हैं "धत पागल हो गए हो क्या !! "

2 comments:

Ravi said...
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Ravi said...

V'Day ka dard khud-2 ke bahar aa raha hai...

वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...