Tuesday, April 20, 2010

अनामिका - १

चला हूँ जिस पथ पे अब तो
पाउँगा मंजिल इसी रास्ते से
भले ही कुछ देर हो जाये

कर्त्तव्य मेरा सिपाही सा
बेहतर है पीछे लौटने से
रण में ही ढेर हो जाये

शाम हो गयी तो क्या
उजालों की तलाश अब
और एक बेर हो जाये

धुंधली दिख रही है तस्वीरें
फिर भी देखूंगा सूरज
ठहरो जरा सबेर हो जाये

** बेर = उत्तर प्रदेश की कड़ी बोली में बेर का तात्पर्य होता है एक बार i.e. once

कॉपीराइट रमन शुक्ला :)

1 comment:

Unknown said...

AAha...maja aa gaya aapki panktiyaan padkar :)

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