Monday, April 19, 2010

हुआ है ये क्या असर

ए हसीं तुझे देख कर
हुआ है ये क्या असर
की जग पड़ी ..दबी हसरतें
चल पड़ा थमा सफ़र

मुस्कुराने लगी
वो खोयी हुई हँसी
गुनगुनाने लगी
जो थी धुन दिल में बसी
लम्हों में जीने लगा
बस तेरा ख्याल कर
हसीं तुझे देख कर
हुआ है ये क्या असर

तारीख थम सी गयी
जब से वो गुजरा है पल
आँख नम हो गयी
दिखा न जो फिर तू कल
लफ्ज़ खामोश हैं
बोलने को बेक़रार हैं नज़र
हसीं तुझे देख कर
हुआ है ये क्या असर

तलाशते हैं तुझे
आते जाते हुए
लौट आये हैं आज
फिर गुनगुनाते हुए
जँहा ये रोशन हैं
बस ये दिल हैं सिफ़र
हसीं तुझे देख कर
हुआ है ये क्या असर

कॉपीराइट रमन शुक्ला :)

1 comment:

luckygopika said...
This comment has been removed by the author.

वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...