पुराने खतों की स्याही मिट गयी
पर शायद लिखावट की गहराई अभी बाकी है
कभी इन पन्नों के दोनो तरफ हुआ करते थे हम दोनो
पर शयब अब मेरे हिस्से की तन्हाई अभी बाकी है
सूख गये गुलाब के वो फूल इन खातों मे दबकर कही
पर आज भी तेरे आँसुओं की परछाई इन खतों मे कही बाकी है
पर शायद लिखावट की गहराई अभी बाकी है
कभी इन पन्नों के दोनो तरफ हुआ करते थे हम दोनो
पर शयब अब मेरे हिस्से की तन्हाई अभी बाकी है
सूख गये गुलाब के वो फूल इन खातों मे दबकर कही
पर आज भी तेरे आँसुओं की परछाई इन खतों मे कही बाकी है
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