Wednesday, April 11, 2018

इश्क़ के हज़ारों रंग

वो बता के चल दिए की इश्क़ के हज़ारों रंग
हमारा रंग कौन सा बस ये नही हमे पता
 पर शायद स्याह सा होगा
और गहरा भी होगा
गतिमान नही होगा
उदास  सा और ठहरा सा होगा
ऐसा होगा जो बस किसी का ना सुनता हो
शायद कुछ बहरा सा होगा
हुस्न के हज़ारों रंग
मेरा शायद सब रंगों पे कोहरा सा होगा 

No comments:

वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...