वो बता के चल दिए की इश्क़ के हज़ारों रंग
हमारा रंग कौन सा बस ये नही हमे पता
पर शायद स्याह सा होगा
और गहरा भी होगा
गतिमान नही होगा
उदास सा और ठहरा सा होगा
ऐसा होगा जो बस किसी का ना सुनता हो
शायद कुछ बहरा सा होगा
हुस्न के हज़ारों रंग
मेरा शायद सब रंगों पे कोहरा सा होगा
हमारा रंग कौन सा बस ये नही हमे पता
पर शायद स्याह सा होगा
और गहरा भी होगा
गतिमान नही होगा
उदास सा और ठहरा सा होगा
ऐसा होगा जो बस किसी का ना सुनता हो
शायद कुछ बहरा सा होगा
हुस्न के हज़ारों रंग
मेरा शायद सब रंगों पे कोहरा सा होगा
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