मयस्सर नही यादें घाव देने वालों की
बस मौजूद है उनकी जो सुकून बसा गये
फेहरिस्त बहुत लंबी थी रुलाने वालों की
अब शाम की चाय पे वो याद आते हैं जो कभी हॅसा गये
बस मौजूद है उनकी जो सुकून बसा गये
फेहरिस्त बहुत लंबी थी रुलाने वालों की
अब शाम की चाय पे वो याद आते हैं जो कभी हॅसा गये
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