तुम्हे बस रहे फ़िक्र इतनी
की जितने जलाओ दिए बुझ ना पायें
की जितने बसाओ गुलशन लूट ना जायें
बस रहे फ़िक्र इतनी की ऐसा ना बोलो
की कही कोई नब्ज़ दुख ना जाए
की जितने जलाओ दिए बुझ ना पायें
की जितने बसाओ गुलशन लूट ना जायें
बस रहे फ़िक्र इतनी की ऐसा ना बोलो
की कही कोई नब्ज़ दुख ना जाए
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