पप्पू , घबराईये नहीं हमारी अदनी सी मित्रमंडली में पाया जाने वाला विशाल सा प्राणी है , और ये हमारा उसे प्यार से दिए हुए नामों में से उसका एक नाम है । वो जीवन के २७ वसंत पार करने के बाद अब विवाह के जाल में बंधने जा रहा है । वास्तविक नाम रजत गुप्ता है बड़ा ही सुन्दर स्वाभाव का नटखट एवं झोल प्राणी है ये मित्र । अब जीवन में तमाम प्रकार के या यूँ कह ले की सभी प्रकार के अनुभवों को चखने के बाद वो अब इस विवाह रुपी माया के जाल में स्वयं ही फसने जा रहा है , सच तो ये है की जब आदमी के पास कुछ करने को नहीं रह जाता तो वो शादी कर लेता है या जब समाज के लोग किसी को कुछ नहीं करते देखना चाहते हैं तो उसकी शादी करवा देते हैं (ये परिकल्पना सिर्फ भारतीय संस्करण में ही सत्य है )। बेचारा जब से शादी तय हुई है बड़ी ही उहापोह स्थिति में घूमता रहता है , अब क्या करे बेचारा एक सच्चा प्यार पाने की तलाश में ( प्यार बोले तो जिसे लोगो ने कुछ इस तरह परिभाषित किया है "अगर प्यार न हो तो जीवन अकारथ हो जाता है , ये सबसे सुखद अहसास है ", आश्चर्य तो तब होता है जब हमें इस सुखद अहसास के ताज को ढोने वाले सारे अनुभवी रोते बिलखते नजर आते हैं फिर भी इसे सुखद अहसास कर दिया जाता है ) कुछ भी कर सकता है , वैसे तो हमारी मित्रमंडली में सभी के सभी बिना प्रेम की गलियां घूमे हुए जिंदगी के राजमार्ग पे चल पड़े थे और अब दूर दूर तक गली क्या कोई छोटा सा नुक्कड़ तक नजर नहीं आता जहाँ आज २ पहर ठिठक कर प्यार न सही प्यार की २ बातें ही कर सके । तो हाँ हम बात कर रहे थे मिया पप्पू (वैधानिक चेतावनी: ये पप्पू कांट डांस वाला पप्पू नहीं है यद्यपि डांस विधा में ये मात्र क ख ग ही शायद जानते हों ) की , हाँ तो ये तो वो जीव थे जिन्हें राह चलती किसी भी दोपाया मादा से जिसकी उम्र २ अंको में हो से प्यार हो जाता था और प्यार की ये तीव्रता उसके घर से कुल दूरी के समानुपाती एवं उस मादा से रिश्ते की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती थी। खैर जिंदगी भर ये इस प्यार के समीकरण का स्थिरांक नहीं ढूंढ पाए और कभी इन्हें खुल के प्यार जताने का मौका मिला नहीं वैसे कुछ एक आध सही सात से मौके मिले थे पर "हम बने तुम बने एक दूजे के लिये"गाना परवान चढ़ते-चढ़ते "बहना ने भाई की कलाई पर प्यार बांधा है"का राग अलापने लगे, बेचारे इसमें इनका भी कोई दोष न था अब इसमें क्या कर सकते हैं थे ही हम इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र जहा पे कुछ ४०० लडको में ३० कन्याये थी मतलब सबके हिस्से में १/१० लगभग और उनमे से भी कुछ को हमारे मित्रजनों ने लड़की मानने से ही इंकार कर दिया था , कारण था उनकी १०० मीटर दूर से सुनाई देती अट्टाहास रुपी हँसी या वो कदम से कदम मिलाये जा टाइप फौजियों वाली चाल, खैर इन सबमे भी प्यार का फूल खिलने की कोसिस शुरू हुई तो पता चला सिनिअर्स के हिस्से में हमसे भी एक तिहाई ही आई थी तो अब जब पूरा गुणा भाग लगा के हिसाब लगाया तो सबके हिस्से में १/५० हिस्सा ही लड़की का आया अब इसमें नंगा नहाता क्या और निचोड़ता क्या । ऐसे में कुछ लोगो को प्यार हुआ और कुछ को करवा दिया गया और संतुलित समाज की अवधारणा को जो गहरा धक्का उस दिन लगा था वो आज तक हमारी विदेश नीतियों को प्रभावित कर रहा है। जाने दो ये तो बीती बातें हैं अब इन्हें (पप्पू को ) मौका मिला है तो शादी से पहले इन्हें कुछ दिन मिले हैं प्यार जताने को तो अब इन्हें देख देख कभी कभी हम विचार करते हैं
जब समय मिला तब प्यार नहीं , अब प्यार है तो समय नाही
अब ऑफिस का गोला मारो काम भाड़ में जाहि !!
इस पूरे किस्से में मजेदार बात ये रही की पहले घर वाले बोलते रहो की शादी कर लो शादी कर लो , और जब ये होने वाली भाभी जी से ये मिले की ऐसे गजब फिसले की उठने के लिए जो हाथ पकड़ा अब वो छोड़ने को तैयार ही नहीं थे , अब आप तो जानते हो हमारे उत्तर प्रदेश की शादी लड़के वालों के मीन मंनौअल वाली बातें और जब फ़ाइनल निर्णय में देर लगी तो हमारे पप्पू जी ने बिस्मिल को सन्देश भिजवा दिया की अगर आपकी हाँ है तो हम शादी कर लेंगे जिस दिन कहोगे उस दिन !! और मन ही मन खुश हुए की अब बन जाऊंगा रजा अपनी बात पूरी कर के लेकिन इससे पहले की ये घर में ताल थोक पते घर वालों ने अपनी पारी घोषित कर दो और हाँ बोल दी तो बेचारे हमारे पप्पू ल्रंतिकारी पति बनते बनते रह गए और बन गए एक अदद पति
अब हमारी इतनी ही दुआ है
जल्दी शादी निपटाए के मन ले हनी मून
नहीं तो बच्चे आ जायेंगे पीने तेरा खून
साथ में एक सलाह है
बुलाईये सभी मित्रों को शादी में भले ही निमंत्रण हो मौन
बेहतर इससे की लोग घर में घुसते ही लोग पूछे भाई ये नया माल कौन
Collection of my few writing attempts, I use to write here what I feel around me.
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वादा है की
सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों उलझने हों या अफ़साने हों खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...
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मेरे दिल में बसा कोई ख्वाब हँसा तो लगा की ये दिन ख़ास है मुस्कुरा के सुबह जो यूँ धरती पे आई जैसे सुहानी सी सौगात है जब जमीं पे पड़ी वो पानी ...
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गुजर जाओ यहा से तो कभी लौट के भी आना है तुम्हारे पीछे चला आ रहा हूँ यह बताने के लिए और तुम हो की डर से सिमाटते जा रहे हो खुद को मुझ...
2 comments:
Bhai ne jo likha sach likh.. aur dil se likha hai...
Bas ek baat add karna chahta hu..Is duniya me sabhi PAPPU hai.. Hum apne aapko PHANTOM samajhte hai fir ek din pata chalta hai ki hum bhi PAPPU hai.. So be aware of the day when u may call yourself "PAPPU". :)
pappu ki shadi hone se jahana khushi ka mahoul hai wahi kuchh sandehatmak prashn bhi hai...
kya shadi ke bad bhi pappu hame wo Tina,Mina, Rina,Anjali,Gitanjali,Patanjali...etc
ke majedar kisse sunayega....
kya shadi ke bad bhi pappu ka purse jeb se gira kare......
Wo dhoshe wala kissa......
wo manager ka uski ... ko fire karana.....
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