Thursday, December 9, 2010

फॉर AP

जिसको आदत थी मेरे कंधे की
कैसे उसने दूसरे के कंधे पे संभाला सर होगा
मेरे दिल सोच के कश्मशाता है
नया आया जो होगा उनके दिल में
देखा उसने वहां मेरा पुराना घर होगा

1 comment:

Gaurav said...

tere kandha ya mera kandha ?? :)))))

वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...