हम खो क्यूँ जाते हैं जब तुम मिल जाते हो
रास्ते मे सुबहा दोपहर रात मे
मदहोश क्यूँ हो जाते हैं जब तुम घुल जाते हो
होने वाली मेरी हर बात मे
रुक जाते हैं आँखे , अटक जाती हैं साँसे जब तुम ढल जाते हो
निकलने वाले मेरे हर जज़्बात मे
सलवटें पड़जाती हैं मेरे बाकी रिश्तों मे जब तुम चले आते हो
बिन बताए मेरे हर ख़यालात मे
हम खो क्यूँ जाते हैं जब तुम मिल जाते हो
रास्ते मे सुबहा दोपहर रात मे
रास्ते मे सुबहा दोपहर रात मे
मदहोश क्यूँ हो जाते हैं जब तुम घुल जाते हो
होने वाली मेरी हर बात मे
रुक जाते हैं आँखे , अटक जाती हैं साँसे जब तुम ढल जाते हो
निकलने वाले मेरे हर जज़्बात मे
सलवटें पड़जाती हैं मेरे बाकी रिश्तों मे जब तुम चले आते हो
बिन बताए मेरे हर ख़यालात मे
हम खो क्यूँ जाते हैं जब तुम मिल जाते हो
रास्ते मे सुबहा दोपहर रात मे
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