Wednesday, July 26, 2017

Bola to tha

कोशिश कब से की
        पर कामयाब नही
आँखो से बोलता रहा
   मुह से निकली आवाज़ नही
अरसा हो गया पिछली बार मिले
  कहा उसे आख़िरी मुलाकात नही
की होती ज़रा हक़ से कोशिश
 तो होता आज फासला इतना परवाज़ नही
कोशिश तब जो की वो कामयाब नही

No comments:

वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...