कुछ रात पूरी बह गयी
हर बात अधूरी रह गयी
तुझे तकने मे ही बीत गया लम्हा
तुझे आँखो से ढकने मे ही बीत गया लम्हा
दिन भर का इंतेज़ार था
बस तू दो पल मे कहानी कह गयी
यूँ वो रात पूरी बह गयी
बस तेरी महक कस्तूरी रह गयी
हर बात अधूरी रह गयी
तुझे तकने मे ही बीत गया लम्हा
तुझे आँखो से ढकने मे ही बीत गया लम्हा
दिन भर का इंतेज़ार था
बस तू दो पल मे कहानी कह गयी
यूँ वो रात पूरी बह गयी
बस तेरी महक कस्तूरी रह गयी
No comments:
Post a Comment