मै सूरज हूँ
कल सुबह फिर निकल आऊंगा
चीर के अंधकार को
भेद के धुन्ध के गुबार को
फिर धरती पे आ जाऊँगा
बनूंगा जीवन किसी के लिए
किसी को प्रचंड ताप से झुलसाऊंगा
मै सूरज हूँ
कल सुबह फिर निकल आऊंगा
बुझाने को अंधेरा
बार बार जल जाऊँगा
निपटा के अपना काम
हर शाम मै ढल जाऊँगा
आज बुला लो कितनी भी रातें
सुबह कल मै फिर आऊंगा
मै सूरज हूँ
कल सुबह फिर निकल आऊंगा
कल सुबह फिर निकल आऊंगा
चीर के अंधकार को
भेद के धुन्ध के गुबार को
फिर धरती पे आ जाऊँगा
बनूंगा जीवन किसी के लिए
किसी को प्रचंड ताप से झुलसाऊंगा
मै सूरज हूँ
कल सुबह फिर निकल आऊंगा
बुझाने को अंधेरा
बार बार जल जाऊँगा
निपटा के अपना काम
हर शाम मै ढल जाऊँगा
आज बुला लो कितनी भी रातें
सुबह कल मै फिर आऊंगा
मै सूरज हूँ
कल सुबह फिर निकल आऊंगा
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