Friday, February 9, 2018

क्या मेरे तेरे दरमियाँ है

सुर्ख अहसास हैं कही साझा ज़ज्बात है कहीं
झूले से पास आते और कभी दूर जाते हालात हैं कहीं
छुपाने को सभी से कभी रात की वीरानीयाँ हैं
मत पूछ की क्या मेरे तेरे दरमियाँ है

सवालों की फेह्रिश्त है उम्मीदों की उलझने है
कहीं बिखरते और कही बनते सभी के सपने हैं
बात से बेहतर एक टक एक दूजे को देखती खामोशियाँ है
अब मत पूछ की क्या मेरे तेरे दरमियाँ है

अलग शहरों के मिज़ाज है पर संग संजोते ख्वाब है
साथ बिताए हुए लम्हों की खुशी बेहिसाब है
अब शाम ढलने को एक साथ लंबी होती परछाईयाँ है
अब मत पूछ की क्या मेरे तेरे दरमियाँ है
सुर्ख अहसास हैं कही साझा ज़ज्बात है कहीं
झूले से पास आते और कभी दूर जाते हालात हैं कहीं
छुपाने को सभी से कभी रात की वीरानीयाँ हैं
मत पूछ की क्या मेरे तेरे दरमियाँ है

सवालों की फेह्रिश्त है उम्मीदों की उलझने है
कहीं बिखरते और कही बनते सभी के सपने हैं
बात से बेहतर एक टक एक दूजे को देखती खामोशियाँ है
अब मत पूछ की क्या मेरे तेरे दरमियाँ है

अलग शहरों के मिज़ाज है पर संग संजोते ख्वाब है
साथ बिताए हुए लम्हों की खुशी बेहिसाब है
अब शाम ढलने को एक साथ लंबी होती परछाईयाँ है
अब मत पूछ की क्या मेरे तेरे दरमियाँ है

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वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...