Friday, February 9, 2018

Kya khareedun?

कुछ यादें खरीद लो, कुछ साँसे खरीद लो
खरीद लो वो चश्मा जो हमे हमारी ग़लती दिखा दे
कुछ माफियाँ खरीद लो बचपन की वो टफियाँ खरीद लो
या खरीद लो वो डब्बा जो इंसानियत सीखा दे
क्या कहा इनमे से कुछ नही मिल रहा !!!
तो जाने दो उन सिक्कों को जो सिर्फ़ तुम्हारी जेब भर देंगे
ज़रूरत पड़ेगी तो सिर्फ़ दो गज़ ज़मीन की
उसका इंतज़ाम तो गैर भी कर देंगे

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वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...