इन ज़मीन के टुकड़ों मे अपनों के कुछ घर थे जो दूसरों के मकानों मे तब्दील हो गये ..
समझाने को मुझे इस बदलाव की खूबसूरती मेरे अपने भी कुछ वक़ील हो गये
- Raman Shukla
समझाने को मुझे इस बदलाव की खूबसूरती मेरे अपने भी कुछ वक़ील हो गये
- Raman Shukla
Collection of my few writing attempts, I use to write here what I feel around me.
सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों उलझने हों या अफ़साने हों खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...
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