सोचता रहता हूँ लंबी होगी बातों की फेहरिस्त
पर मुख्तसर अपनी मुलाकात होतीं हैं
यादों के साए मे बीत जाते हैं दिन
मुश्किल बिताना वो छोटी सी रात होती है
गैर मौजूदगी मे तेरे मौसम तो सारे बीत जाते हैं
बस मुश्किल बिताना वो बरसात होती है
इतना भी वक़्त नही मयस्सर की खो जाऊं तुझमे
की बस मुख्तसर अपनी मुलाकात होती है
पर मुख्तसर अपनी मुलाकात होतीं हैं
यादों के साए मे बीत जाते हैं दिन
मुश्किल बिताना वो छोटी सी रात होती है
गैर मौजूदगी मे तेरे मौसम तो सारे बीत जाते हैं
बस मुश्किल बिताना वो बरसात होती है
इतना भी वक़्त नही मयस्सर की खो जाऊं तुझमे
की बस मुख्तसर अपनी मुलाकात होती है
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