सन्त्रप्त इस विपत्ति काल मे निंद्रा कोसों दूर हो
भौंहे चढ़ि तन ताना जैसे खड़ा कोई वीर शूर हो
तैयार रण को हो तेरे हाथों मे शश्त्र शत्रु के काल हो
समय आक्रमण का है ना किंचित मन मे भी कोई ढाल हो
भौंहे चढ़ि तन ताना जैसे खड़ा कोई वीर शूर हो
तैयार रण को हो तेरे हाथों मे शश्त्र शत्रु के काल हो
समय आक्रमण का है ना किंचित मन मे भी कोई ढाल हो
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