Friday, August 28, 2009

मोहब्बत किशमिश से छुहारा न हुई

अभी कल की ही बात है सोशल नेट्वर्किंग साईट ऑरकुट पे मैंने किसी दोस्त को ये शेर लिख के भेजा
तुम्हे वो बचपन सी मोहब्बत दुबारा न हुई !!
तुम्हे वो बचपन सी मुहब्बत दुबारा न हुई ,
कुछ यूँ नज़र लगी तुम्हारी अशिय्नाए को मेरी
की कभी फिर तुम्हारी मोहब्बत किशमिश से छुहारा न हुई
और शीघ्र ही मुझे एक अन्य मित्र से निचे लिखा extension मिला
अगर हो जाती मोहब्बत किसमिस से छुहारा ...
तो यूँ ही ना घूमते आवारा ....
कसम आशियाने की , वहां आग लगाना ही बेहतर था ...
हमें जो चाहिए था , उनसे छुटकारा ....

वास्तव में जब मैंने दोनों को जोड़कर पढ़ा तो काफी देर तक मै मन ही मन मुस्कुराता रहा, basically मेरा कुछ ७-८ मित्रों का समूह है जो की आपस में कई समानताएं रखते हैं जिसमे से मजोर समानता है की हममे से किसी की गर्लफ्रेंड नही है :) अगर गौर से देखा जाए तो इसकी वजह एक ही है की जब तक वो आती नही है तब तक हम रोते हैं की आती नही है और जब गलती से कभी आ जाती है तो रोते हैं की कम्बखत जाती नही है

3 comments:

luckygopika said...

achha hai!!!

Pragati said...

Hmmmmmmmm... Sahi hai... It means dat u guys are looking out for flexible galfrind... :)

A S said...

Wah Wah Wah... ye to galib ka induction effect maloom hota hai janaam..just to add one differnet angle.


wo bachpan si mohabbat dubara na hui.. kyunki kambakht doston ko ye baat gawara na hui..

वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...