Tuesday, August 22, 2017

Sachin Ne kaha to maine likha

उस राह की तुझे तलाश है
मंज़िल जिसमे कही पास  है
उस रात से तू घबरा रहा
सन्नाटा जिसमे पसारता जा रहा
तू उस धुन्ध से लड़ने को तैयार है
जिसके उस तरफ सिर्फ़ प्यार है
साधने को सुबह धुन्ध और रात को
साथ अपनों का एक कारवाँ चाहिए
जी भर के उड़ने को एक और उड़ान
बस यन्हि एक आसमाँ चाहिए

1 comment:

Unknown said...

No Words ...
Wahhh Wahhh, Wahhh Wahh

वादा है की

  सुर्खियाँ हो या झुर्रियाँ हों     नज़दीकियाँ या फिर दूरियाँ हों   उलझने हों या अफ़साने हों   खफा हों तुमसे या तुम्हारे ...