उस राह की तुझे तलाश है
मंज़िल जिसमे कही पास है
उस रात से तू घबरा रहा
सन्नाटा जिसमे पसारता जा रहा
तू उस धुन्ध से लड़ने को तैयार है
जिसके उस तरफ सिर्फ़ प्यार है
साधने को सुबह धुन्ध और रात को
साथ अपनों का एक कारवाँ चाहिए
जी भर के उड़ने को एक और उड़ान
बस यन्हि एक आसमाँ चाहिए
मंज़िल जिसमे कही पास है
उस रात से तू घबरा रहा
सन्नाटा जिसमे पसारता जा रहा
तू उस धुन्ध से लड़ने को तैयार है
जिसके उस तरफ सिर्फ़ प्यार है
साधने को सुबह धुन्ध और रात को
साथ अपनों का एक कारवाँ चाहिए
जी भर के उड़ने को एक और उड़ान
बस यन्हि एक आसमाँ चाहिए
1 comment:
No Words ...
Wahhh Wahhh, Wahhh Wahh
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