Monday, November 12, 2018

कुछ कम है मेरे पास

कुछ कम सा है मेरे दिमाग़ मे
और कुछ कम सा है दिल मे भी मेरे
कुछ दिन भी कम हो गये हैं मेरे वक़्त मे
और कुछ मुस्कुराहटें  भी कम हैं
कम हो गयी है कुछ चाय की   प्यालियाँ
सुनने  वालों ने बताया की कमी है शब्दों की मेरी कविताओं मे
ये जो तुम सब का सोच लेते हो अपने दिमाग़ से
और समेट लेते हो सब कुछ इस दिल मे
जो वक़्त शायद बिता सकता था तुम्हारे साथ
और हस सकता था कुछ लम्हे दिल खोल कर
वो लकड़ी की मेज पे ख़टकते चायके प्याले जो बिना तुम्हारे ठंडे हो गये
और वो जो कभी कह नही पाया तुम्हारे सामने
यही सब कम है मेरे पास , जो कम है वो बस तुम हो


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