बिखरे हुए पन्ने फैले हुए थे
वो पन्ने जो स्याही के निशान से मैले हुए थे
कुछ ताज़ा याद की मेज से गिरे थे
तो कुछ यादों की दराज़ों से बह निकले थे
हवा की ठोकर से जिल्द पन्नों से रूठ गयी थी
बिखरे थे पन्ने की शायद कोई खिड़की खुली छूट गयी थी
बिखरे थे पन्ने की शायद कोई खिड़की खुली छूट गयी थी
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