Saturday, November 24, 2018

यादें हैं की पन्ने हैं

बिखरे हुए पन्ने फैले हुए थे 
वो पन्ने जो स्याही के निशान से मैले हुए थे 
कुछ ताज़ा याद की मेज से गिरे थे
तो कुछ यादों की दराज़ों से बह निकले थे
हवा की ठोकर से जिल्द पन्नों से रूठ गयी थी
बिखरे थे पन्ने  की शायद कोई खिड़की खुली छूट गयी थी

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