इतना खो के सब मिला की मै शर्मिंदा रहना चाहता हूँ
जाते जाते जान के भी मै ज़िंदा रहना चाहता हूँ
अब आराम से बैठने को ज़मीन बहुत है
पर इस खुले आसमान मे मै परिंदा रहना चाहता हूँ
जाते जाते जान के भी मै ज़िंदा रहना चाहता हूँ
अब आराम से बैठने को ज़मीन बहुत है
पर इस खुले आसमान मे मै परिंदा रहना चाहता हूँ
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